Author: BhaktiParv.com
क्या आप जानना चाहते हैं कि कलयुग की कुल अवधि कितनी है, अब तक कितने वर्ष बीत चुके हैं, और कितने वर्ष शेष हैं?
हिंदू धर्म के अनुसार, समय को चार युगों में बाँटा गया है — सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलयुग।
हर युग का अपना महत्व और निश्चित काल होता है।
आइए विस्तार से समझते हैं कि कलयुग की कुल अवधि कितनी है और अभी कितनी शेष बची है।
चार युगों का क्रम और उनकी अवधि
धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि एक महायुग (चतुर्युग) में चार युग आते हैं।
प्रत्येक युग की अवधि इस प्रकार है:
| युग का नाम | अवधि (मानव वर्षों में) |
|---|---|
| सतयुग | 17,28,000 वर्ष |
| त्रेतायुग | 12,96,000 वर्ष |
| द्वापरयुग | 8,64,000 वर्ष |
| कलयुग | 4,32,000 वर्ष |
इस प्रकार, एक महायुग = 43,20,000 वर्ष का होता है।
हर युग के साथ धर्म, सत्य और मानवता की शक्ति में कमी आती जाती है।
कलयुग की शुरुआत कब हुई?
श्रीमद्भागवत महापुराण और विष्णु पुराण के अनुसार,
कलयुग की शुरुआत भगवान श्रीकृष्ण के पृथ्वी त्यागने के बाद,
18 फरवरी 3102 ईसा पूर्व को हुई थी।
उस समय से लेकर आज (साल 2025) तक लगभग 5,127 वर्ष बीत चुके हैं।
कलयुग की कुल अवधि
कलयुग की कुल अवधि 4,32,000 वर्ष मानी गई है।
अगर अब तक 5,127 वर्ष बीत चुके हैं, तो शेष अवधि लगभग 4,26,873 वर्ष बची है।
यानी अभी कलयुग की शुरुआत ही कही जा सकती है —
क्योंकि लगभग 98% समय शेष है।
कलयुग के लक्षण क्या हैं?
हिंदू शास्त्रों में बताया गया है कि जैसे-जैसे कलयुग आगे बढ़ेगा,
मानव जीवन में सत्य, करुणा और धर्म की शक्ति घटती जाएगी।
यहाँ कुछ प्रमुख लक्षण बताए गए हैं:
- लोगों में लोभ, अहंकार और क्रोध की वृद्धि।
- रिश्तों में स्वार्थ का प्रवेश।
- धर्म का पतन और अधर्म का विस्तार।
- धन को ही सर्वोच्च मानने की प्रवृत्ति।
- पाप कर्म और हिंसा का बढ़ना।
- प्राकृतिक आपदाएँ और युद्ध अधिक होना।
फिर भी, भगवान ने कलयुग में एक विशेष वरदान दिया है —
“कलौ केवल नामाधारम्”
अर्थात — कलयुग में केवल भगवान का नाम लेने से ही मुक्ति संभव है।
कलयुग का अंत कैसे होगा?
श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार,
जब अधर्म अपनी चरम सीमा पर पहुँच जाएगा,
तब भगवान विष्णु अपने कल्कि अवतार में प्रकट होंगे।
वे अधर्म का नाश करके नए सतयुग का प्रारंभ करेंगे।
यही प्रक्रिया हर महायुग के बाद दोहराई जाती है।
कलयुग में मुक्ति का मार्ग क्या है?
कलयुग में कठिन तपस्या या यज्ञ संभव नहीं,
इसलिए भगवान ने भक्ति और नाम-स्मरण को ही सबसे सरल साधन बताया है।
हरे कृष्ण हरे राम,
हर हर महादेव,
जय श्रीराम
जैसे नामों का जाप ही आत्मा को शुद्ध करता है।
कलयुग से जुड़े कुछ धार्मिक तथ्य
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कलयुग की शुरुआत | 3102 ईसा पूर्व |
| वर्तमान वर्ष (2025 तक) | लगभग 5,127 वर्ष बीत चुके |
| कुल अवधि | 4,32,000 वर्ष |
| शेष अवधि | लगभग 4,26,873 वर्ष |
| अगला युग | सतयुग |
| अंतिम अवतार | भगवान विष्णु का कल्कि अवतार |
कलयुग में मानवता के लिए संदेश
कलयुग में चुनौतियाँ अधिक हैं,
लेकिन अवसर भी उतने ही बड़े हैं —
क्योंकि भगवान ने कहा है कि जो भक्त सच्चे मन से नाम जपता है,
वह युग के प्रभाव से ऊपर उठ सकता है।
इसलिए,
भले ही कलयुग के हजारों वर्ष बाकी हों,
पर भक्ति, करुणा और सत्कर्म ही हमें सही दिशा दे सकते हैं।
Final Thoughts
कलयुग केवल अंधकार का युग नहीं,
यह वह समय भी है जब भगवान के नाम से ही मुक्ति संभव है।
जितनी सच्ची भक्ति होगी, उतना ही मनुष्य ईश्वर के निकट होगा।
इसलिए,
हर दिन ईश्वर का नाम लें, सत्य और प्रेम का पालन करें —
यही कलयुग में सबसे बड़ी साधना है।
FAQ
Q1. कलयुग कब शुरू हुआ था?
3102 ईसा पूर्व में, जब श्रीकृष्ण ने पृथ्वी से प्रस्थान किया।
Q2. कलयुग की कुल अवधि कितनी है?
4,32,000 वर्ष।
Q3. 2025 तक कलयुग के कितने वर्ष बीत चुके हैं?
लगभग 5,127 वर्ष।
Q4. कलयुग के कितने वर्ष शेष हैं?
लगभग 4,26,873 वर्ष।
Q5. कलयुग में मुक्ति कैसे संभव है?
भक्ति, ईश्वर का नाम-स्मरण और अच्छे कर्म से।
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