Author: BhaktiParv.com
शिवरात्रि मेला जूनागढ़ 2026 का पावन पर्व 15 फरवरी 2026, रविवार को मनाया जाएगा। गुजरात के ऐतिहासिक शहर जूनागढ़ में स्थित गिरनार पर्वत की तलहटी में आयोजित होने वाला यह मेला भगवान शिव की आराधना, साधु-संतों की उपस्थिति और हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। हर वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर लगने वाला यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, लोकपरंपरा और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत उत्सव बन जाता है।
शिवरात्रि मेला जूनागढ़ का आध्यात्मिक महत्व

शिवरात्रि मेला जूनागढ़ 2026 भगवान शिव की उपासना का अत्यंत पवित्र अवसर है। मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात भगवान शिव ने तांडव किया था और इसी दिन उनका पार्वती माता से दिव्य विवाह भी हुआ था। इस कारण यह पर्व सृष्टि, ऊर्जा और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक माना जाता है।
जूनागढ़ का यह मेला विशेष रूप से महत्वपूर्ण इसलिए भी है क्योंकि यहां गिरनार पर्वत के समीप स्थित भवनाथ महादेव मंदिर में हजारों वर्षों से तपस्या और साधना की परंपरा चली आ रही है। श्रद्धालु मानते हैं कि यहां की पूजा-अर्चना जीवन में शांति, शक्ति और सकारात्मक परिवर्तन लाती है।
गिरनार पर्वत और भव्य भवनाथ महादेव मंदिर
गिरनार पर्वत भारत के सबसे प्राचीन और पवित्र पर्वतों में से एक माना जाता है। इसकी तलहटी में स्थित भवनाथ महादेव मंदिर शिवभक्तों की आस्था का केंद्र है। शिवरात्रि के समय यह क्षेत्र दीपों, भजनों और मंत्रोच्चार से आलोकित हो उठता है।
मंदिर परिसर में निरंतर रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और शिव आरती का आयोजन होता है। भक्त पूरे दिन व्रत रखते हैं और रातभर जागरण कर भगवान शिव की उपासना करते हैं। यह वातावरण आत्मिक शांति और दिव्यता का गहरा अनुभव कराता है।
शिवरात्रि मेला जूनागढ़ 2026 की मुख्य तिथियां और आयोजन
शिवरात्रि मेला जूनागढ़ 2026 कई दिनों तक चलने वाला भव्य धार्मिक उत्सव है। महाशिवरात्रि के दिन विशेष पूजा, अभिषेक और आध्यात्मिक अनुष्ठान संपन्न होते हैं। इसके साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन संध्या और लोकनृत्य भी आयोजित किए जाते हैं।
मेले के दौरान हजारों साधु-संत गिरनार क्षेत्र में एकत्रित होते हैं। यह समय साधना, तपस्या और आध्यात्मिक चिंतन के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालु मंदिर में जल, दूध और बिल्वपत्र अर्पित कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
साधु-संतों की शोभायात्रा और नागा साधुओं की परंपरा
शिवरात्रि मेला जूनागढ़ 2026 की सबसे आकर्षक परंपरा नागा साधुओं की दिव्य शोभायात्रा है। यह शोभायात्रा आधी रात के समय निकलती है और भक्ति से भरे वातावरण में साधु-संत पवित्र कुंड में स्नान कर पूजा करते हैं।
नागा साधु अपनी कठोर तपस्या, वैराग्य और आध्यात्मिक शक्ति के लिए प्रसिद्ध होते हैं। उनकी उपस्थिति मेले को अलौकिक और दिव्य स्वरूप प्रदान करती है। श्रद्धालु इस दृश्य को अत्यंत पवित्र और दुर्लभ मानते हैं।
श्रद्धालुओं के लिए यात्रा मार्ग और सुविधाएं
जूनागढ़ गुजरात का एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल है, जहां सड़क और रेल मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। निकटतम हवाई अड्डा राजकोट में स्थित है, जहां से सड़क मार्ग द्वारा जूनागढ़ पहुंचा जा सकता है।
मेले के दौरान प्रशासन द्वारा विशेष सुरक्षा, चिकित्सा और आवास सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। अस्थायी शिविर, भोजन व्यवस्था और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाता है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
मेले का सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व
शिवरात्रि मेला जूनागढ़ 2026 केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक उत्सव भी है। यहां गुजरात की लोकसंस्कृति, संगीत, नृत्य और पारंपरिक कला का सुंदर प्रदर्शन देखने को मिलता है।
स्थानीय व्यापारियों और कारीगरों के लिए यह मेला आजीविका का महत्वपूर्ण अवसर भी बनता है। हस्तशिल्प, पूजा सामग्री और पारंपरिक व्यंजन श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। इस प्रकार यह मेला सामाजिक एकता और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देता है।
आध्यात्मिक अनुभव और भक्ति का वातावरण
शिवरात्रि की रात गिरनार क्षेत्र में अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा महसूस होती है। हर ओर हर-हर महादेव के जयघोष, मंदिरों की घंटियां और भजन-कीर्तन की ध्वनि वातावरण को पवित्र बना देती है।
भक्त ध्यान, जप और साधना के माध्यम से आत्मिक शांति का अनुभव करते हैं। यह समय आत्मचिंतन और ईश्वर से जुड़ने का सर्वोत्तम अवसर माना जाता है। शिवरात्रि मेला जूनागढ़ 2026 श्रद्धालुओं को जीवन की सकारात्मक दिशा का संदेश देता है।
पर्यावरण संरक्षण और व्यवस्था प्रबंधन
हाल के वर्षों में मेले के दौरान पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्लास्टिक उपयोग पर नियंत्रण, स्वच्छता अभियान और हरित पहलें इस आयोजन को अधिक संतुलित बनाती हैं।
स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवी संगठन मिलकर यह सुनिश्चित करते हैं कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रकृति का सम्मान भी बना रहे। यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करता है।
भक्तों के लिए आवश्यक सावधानियां और सुझाव
शिवरात्रि मेला जूनागढ़ 2026 में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं को यात्रा की पूर्व योजना बनानी चाहिए। भीड़भाड़ को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित मार्ग, आवश्यक दवाइयां और पहचान पत्र साथ रखना उपयोगी होता है।
व्रत और पूजा के दौरान स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है। प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने से यात्रा अधिक सुखद और सुरक्षित बनती है।
Final Thoughts
शिवरात्रि मेला जूनागढ़ 2026 आस्था, परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का भव्य उत्सव है। यह केवल एक धार्मिक मेला नहीं, बल्कि आत्मिक जागरण और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक है। गिरनार की पवित्र भूमि पर मनाया जाने वाला यह पर्व श्रद्धालुओं को भगवान शिव की दिव्य ऊर्जा से जोड़ता है और जीवन में शांति, शक्ति तथा सकारात्मकता का संदेश देता है।
इस पावन अवसर पर जूनागढ़ पहुंचकर भगवान भवनाथ महादेव के दर्शन करना हर शिवभक्त के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन जाता है।
FAQ
शिवरात्रि मेला जूनागढ़ 2026 का आयोजन महाशिवरात्रि के पावन दिन 15 फरवरी 2026 को होगा।
गिरनार पर्वत की तलहटी में स्थित भवनाथ महादेव मंदिर इस मेले का मुख्य केंद्र है।
नागा साधुओं की आधी रात की शोभायात्रा मेले की सबसे प्रमुख परंपरा मानी जाती है।
रेल, सड़क और निकटतम हवाई अड्डे के माध्यम से जूनागढ़ आसानी से पहुंचा जा सकता है।
मेले के दौरान प्रशासन द्वारा सुरक्षा, स्वास्थ्य और आवास की विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं।
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