हनुमान चालीसा 2025: सम्पूर्ण पाठ, अर्थ और अद्भुत लाभ जानें

Lord Hanuman with glowing aura and devotees chanting Hanuman Chalisa during Hanuman Chalisa 2025 celebration

हनुमान चालीसा (अर्थ सहित)

दोहा :

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।

अर्थ: गुरु के चरणों की धूल से अपने मन के दर्पण को स्वच्छ करके, मैं श्रीराम के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ जो धर्म, अर्थ, काम, और मोक्ष — इन चारों फलों को देने वाला है।

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

अर्थ: हे पवनपुत्र हनुमान! मैं बुद्धिहीन हूँ, मुझे बल, बुद्धि और विद्या दो और मेरे सभी कष्ट व दोष दूर करो।


चौपाई :

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।

अर्थ: हनुमान जी आप ज्ञान और गुणों के सागर हैं, तीनों लोकों में आपकी महिमा प्रसिद्ध है।

रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

अर्थ: आप श्रीराम के दूत हैं, अतुलनीय बल के धाम हैं, अंजनी के पुत्र और पवनदेव के नाम से प्रसिद्ध हैं।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।

अर्थ: आप महान पराक्रमी हैं, आपकी देह वज्र के समान है, आप बुरी बुद्धि को दूर कर अच्छी बुद्धि के साथी हैं।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा।।

अर्थ: आपका शरीर सोने के समान दमकता है, कानों में कुंडल हैं और बाल घुँघराले हैं।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
कांधे मूंज जनेऊ साजै।

अर्थ: आपके हाथ में वज्र और ध्वजा शोभा दे रहे हैं, और कंधे पर जनेऊ सुसज्जित है।

संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बन्दन।।

अर्थ: आप भगवान शंकर के अंश और केसरी के पुत्र हैं, आपका तेज और प्रभाव तीनों लोकों में प्रसिद्ध है।

विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।

अर्थ: आप विद्वान, गुणी और अत्यंत चतुर हैं, सदा श्रीराम के कार्य करने को उत्सुक रहते हैं।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।

अर्थ: आप श्रीराम के चरित्र सुनने में आनंद लेते हैं, और राम, लक्ष्मण, सीता आपके हृदय में विराजते हैं।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।

अर्थ: आपने सीता जी को खोजने के लिए सूक्ष्म रूप धारण किया, और लंका जलाने के लिए विकट रूप लिया।

भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।।

अर्थ: आपने भयंकर रूप धारण कर राक्षसों का नाश किया और श्रीराम के कार्य पूर्ण किए।

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।

अर्थ: आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी का जीवन बचाया, जिससे श्रीराम हर्षित होकर आपको हृदय से लगा लिया।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

अर्थ: श्रीराम ने आपकी प्रशंसा की और कहा कि तुम मुझे भरत के समान प्रिय हो।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।

अर्थ: सहस्त्र मुख वाले भी आपकी महिमा का वर्णन नहीं कर सकते, यह कहकर श्रीराम ने आपको गले लगाया।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।

अर्थ: सनक, ब्रह्मा, नारद, सरस्वती और शेषनाग जैसे देवता आपकी महिमा का गान करते हैं।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।

अर्थ: यमराज, कुबेर और अन्य देवता भी आपके गुणों का पूर्ण वर्णन नहीं कर सकते।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

अर्थ: आपने सुग्रीव का उपकार किया, श्रीराम से मिलवाकर उसे राजपद दिलाया।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना।।

अर्थ: विभीषण ने आपकी सलाह मानी और लंका के राजा बने, यह सबको ज्ञात है।

जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

अर्थ: आपने बाल्यावस्था में सूर्य को मीठा फल समझकर निगल लिया।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।

अर्थ: श्रीराम की मुद्रिका मुख में रखकर आपने समुद्र पार किया, यह कोई आश्चर्य नहीं।

दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

अर्थ: संसार के सब कठिन काम आपकी कृपा से सरल हो जाते हैं।

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।

अर्थ: आप श्रीराम के द्वार के रक्षक हैं, आपकी अनुमति बिना कोई प्रवेश नहीं कर सकता।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना।।

अर्थ: जो आपकी शरण में आता है, उसे सब सुख मिलता है और उसे किसी से भय नहीं रहता।

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।

अर्थ: आप अपने तेज को स्वयं नियंत्रित रखते हैं, पर तीनों लोक आपके प्रभाव से कांपते हैं।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।

अर्थ: जब कोई महावीर हनुमान का नाम लेता है, तो भूत-पिशाच पास नहीं आते।

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।

अर्थ: जो निरंतर हनुमान जी का जाप करता है, उसके सब रोग और पीड़ाएँ दूर हो जाती हैं।

संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।

अर्थ: जो मन, वचन और कर्म से हनुमान जी का ध्यान करता है, उसके संकट दूर हो जाते हैं।

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।

अर्थ: भगवान राम सबसे श्रेष्ठ तपस्वी राजा हैं और आपने उनके सभी कार्य पूर्ण किए।

और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै।।

अर्थ: जो व्यक्ति मन से आपकी भक्ति करता है, उसे अनंत सुख और फल मिलता है।

चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।

अर्थ: आपका पराक्रम चारों युगों में प्रसिद्ध है, आपकी महिमा से संसार आलोकित है।

साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।

अर्थ: आप साधु-संतों के रक्षक और असुरों के विनाशक हैं, आप श्रीराम के प्रिय हैं।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।

अर्थ: माता सीता ने आपको आठ सिद्धियों और नौ निधियों का दाता होने का वरदान दिया।

राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।

अर्थ: आपके पास श्रीराम के नाम का अमृत है, आप सदा उनके दास बने रहते हैं।

तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै।।

अर्थ: आपके भजन से श्रीराम की प्राप्ति होती है और जन्म-जन्म के दुःख मिट जाते हैं।

अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।

अर्थ: मृत्यु के समय जो आपका स्मरण करता है, वह रामलोक जाता है और पुनर्जन्म में हरिभक्त कहलाता है।

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।

अर्थ: अन्य देवताओं की ओर मन न लगाकर जो हनुमान जी की भक्ति करता है, उसे सभी सुख प्राप्त होते हैं।

संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

अर्थ: जो हनुमान जी का स्मरण करता है, उसके सभी संकट और पीड़ाएँ मिट जाती हैं।

जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

अर्थ: हे हनुमान जी! आपकी जय हो, आप गुरु के समान हम पर कृपा करें।

जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई।।

अर्थ: जो व्यक्ति सात बार हनुमान चालीसा का पाठ करता है, वह बंधनमुक्त होकर महान सुख प्राप्त करता है।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

अर्थ: जो भक्त श्रद्धा से हनुमान चालीसा पढ़ता है, उसे सिद्धि प्राप्त होती है, इसके साक्षी स्वयं भगवान शंकर हैं।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।

अर्थ: तुलसीदास सदैव भगवान के सेवक हैं, हे हनुमान जी! आप मेरे हृदय में निवास करें।


दोहा :

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

अर्थ: हे पवनपुत्र संकटमोचन! आप मंगलमूर्ति हैं, श्रीराम, लक्ष्मण और सीता सहित मेरे हृदय में निवास करें।

हनुमान चालीसा पाठ के लाभ

  1. भय, रोग और दुख दूर होते हैं।
  2. नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।
  3. मन को शांति और आत्मबल प्राप्त होता है।
  4. जीवन में सफलता और सुख बढ़ता है।
  5. भूत-प्रेत और बाधाओं से रक्षा होती है।
  6. मानसिक, आध्यात्मिक और शारीरिक संतुलन बना रहता है।

जय श्री हनुमान जी महाराज की! 🙏


Category: Hanuman Bhakti | Hindu Devotional | Spiritual Practices

Author: BhaktiParv.com

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