Author: BhaktiParv.com
Introduction
भारत में धर्म, संस्कृति और परंपरा हमेशा से जनभावनाओं का केंद्र रही है। इसी भाव को जीवित रखने और समाज में एकता का संदेश फैलाने के उद्देश्य से बाबा बागेश्वर (Dhirendra Krishna Shastri) ने साल 2025 में एक भव्य और ऐतिहासिक यात्रा शुरू की — “Sanatan Hindu Ekta Padyatra 2025”।
इस यात्रा में लाखों श्रद्धालु जुड़े, कई प्रसिद्ध संत, सामाजिक हस्तियाँ, सेलेब्रिटी, राजनेता और साधु-संत साथ चले।
इस ब्लॉग में हम देखेंगे:
- यह यात्रा कहाँ और कब शुरू हुई
- क्यों शुरू करनी पड़ी
- असल उद्देश्य क्या था
- कौन-कौन इस यात्रा में शामिल हुआ
- यात्रा में रोज क्या-क्या हुआ
- इसका समाज पर क्या प्रभाव पड़ा
यह पूरी रिपोर्ट आपको यात्रा की शुरुआत से अंत तक सब कुछ बताएगी।
पदयात्रा कब और कहाँ से शुरू हुई?
Sanatan Hindu Ekta Padyatra 2025 की शुरुआत 7 नवंबर 2025 को
दिल्ली के प्रसिद्ध कात्यायनी माता मंदिर (छतरपुर) से सुबह विशाल कलश-यात्रा और ध्वज-पूजन के साथ हुई।
यात्रा लगभग 150–170 किलोमीटर लंबी थी और यह तीन राज्यों से होकर गुजरी:
- दिल्ली
- हरियाणा
- उत्तर प्रदेश
इसका अंतिम पड़ाव था वृंदावन — जहाँ यात्रा का समापन 16 नवंबर 2025 को
बांके बिहारी मंदिर में दर्शन के साथ हुआ।
आखिर यह हिंदू एकता यात्रा करनी क्यों पड़ी?
बाबा बागेश्वर ने इस पदयात्रा को “वैचारिक यात्रा” बताया।
उनका कहना था कि:
- समाज में बढ़ती दूरियाँ, जात-पात और विभाजन को मिटाना जरूरी है।
- हिंदुओं को एकता, संस्कृति और सनातन परंपरा के लिए संगठित होना चाहिए।
- सनातन धर्म पर हो रहे वैचारिक हमलों का जवाब शांतिपूर्ण, अहिंसक और वैचारिक एकता से दिया जा सकता है।
इस यात्रा के मुख्य उद्देश्य:
1. हिंदुओं में एकता का संदेश
“जात-पात, ऊँच-नीच सब भूलकर एक समाज बने — यही मेरी इच्छा है।”
— बाबा बागेश्वर
2. हिंदू राष्ट्र की अवधारणा मजबूत करना
कई स्थानों पर यह संदेश दिया गया कि
भारत का संविधान सनातन मूल्यों पर बना है और हिंदू राष्ट्र की पहचान सांस्कृतिक रूप से मजबूत होनी चाहिए।
3. ब्रज संस्कृति का पुनरुद्धार
वृंदावन, मथुरा, यमुना — इनसे जुड़ी पवित्र परंपराओं को संरक्षित करने की मांग।
4. धर्मांतरण और भेदभाव पर रोक
यात्रा में खुले रूप से कहा गया कि धार्मिक धोखे, अवैध धर्मांतरण जैसी समस्याओं पर रोक लगनी चाहिए।
5. युवा पीढ़ी को सनातन से जोड़ना
यात्रा में बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी इस उद्देश्य को सफल साबित करती है।
इस यात्रा में कौन-कौन जुड़ा था?
इस यात्रा की खास बात थी कि यह सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं रहा — बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और सेलिब्रिटी भागीदारी वाला बड़ा मिशन बन गया।
1. बाबा बागेश्वर (Dhirendra Krishna Shastri) – मुख्य नेतृत्व
यात्रा का संपूर्ण नेतृत्व बाबा बागेश्वर ने किया।
वे शुरुआत से लेकर वृंदावन पहुंचने तक हर दिन यात्रियों के साथ चलते रहे।
2. बड़े साधु-संत
देशभर के कई संत इसमें जुड़े, जैसे:
- दिद्दी माँ ऋतंभरा
- महंत राजू दास
- ज्ञानानंद महाराज
- सुधांशु महाराज
- कई अखाड़ों और मठों के प्रतिनिधि
इन संतों की उपस्थिति ने यात्रा को आध्यात्मिक रूप से और अधिक प्रभावशाली बना दिया।
3. बॉलीवुड सेलेब्रिटी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार:
- शिल्पा शेट्टी
- राजपाल यादव
यात्रा में शामिल हुए।
इनके आने से यात्रा को राष्ट्रीय स्तर पर और भी ज्यादा चर्चा मिली।
4. सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन
कई स्थानीय समूह और सामाजिक संस्थाएँ इसमें शामिल हुईं।
इनका काम था:
- भोजन-प्रसाद की व्यवस्था
- सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवा
- महिला यात्रियों की मदद
- ध्वज और कलश-पूजन का प्रबंधन
5. आम श्रद्धालु और ग्रामीण
लाखों लोग हर दिन यात्रा से जुड़ते गए।
दिल्ली, हरियाणा, मथुरा, वृंदावन — हर जगह जनसैलाब उमड़ता गया।
यात्रा में रोज क्या-क्या हुआ?
✔ कलश-यात्रा और ध्वज-पूजन
यात्रा की शुरुआत में महिलाएँ कलश लेकर चलीं और पुरुषों ने भगवा ध्वज थामे रखा।
✔ भजन-कीर्तन और प्रवचन
हर पड़ाव पर बाबा बागेश्वर और अन्य संत प्रवचन देते रहे।
✔ युवा-सभा
युवा पीढ़ी को सनातन परंपराओं से जोड़ने पर जोर दिया गया।
✔ महिला सुरक्षा और सहभागिता
यात्रा में काफी संख्या में महिलाएँ शामिल हुईं और उनके लिए अलग व्यवस्थाएँ की गईं।
✔ सामाजिक संदेश
पर्यावरण, गौ-संरक्षण, यमुना सफाई और शिक्षा पर विशेष भाषण दिए गए।
क्या इस यात्रा को लेकर विवाद भी हुए?
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में राजनीति से जोड़ने की कोशिश हुई।
लेकिन बाबा बागेश्वर ने हर बार कहा:
“यह वैचारिक यात्रा है, किसी समुदाय के खिलाफ नहीं। हमारा लक्ष्य सिर्फ हिंदू एकता है।”
इस बयान ने विवादों को काफी हद तक शांत किया।
Impact: यात्रा का प्रभाव क्या रहा?
✔ राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा
सोशल मीडिया से लेकर टीवी न्यूज तक — यह यात्रा हफ्तों तक ट्रेंड में रही।
✔ युवा पीढ़ी की भागीदारी बढ़ी
हजारों युवाओं ने साथ चलकर सनातन धर्म से जुड़ाव मजबूत किया।
✔ सांस्कृतिक पुनर्जागरण का संदेश
ब्रज क्षेत्र में सांस्कृतिक चेतना बढ़ी, यमुना सफाई जैसे मुद्दे फिर चर्चा में आए।
✔ समाज में “एकता” का संदेश
यात्रा के कारण जात-पात, विभाजन और भेदभाव पर चिंतन बढ़ा।
Final Thoughts
Sanatan Hindu Ekta Padyatra 2025 सिर्फ एक पदयात्रा नहीं रही —
यह एक आंदोलन, एक सांस्कृतिक जागरण, और एक सनातन एकता का संदेश बनकर सामने आई।
बाबा बागेश्वर के नेतृत्व में चली यह यात्रा यह साबित करती है कि जब समाज एक साथ चलता है, तब बदलाव की दिशा स्वतः बनती है।
