शिव चालीसा 2025: सम्पूर्ण पाठ, अर्थ और चमत्कारी लाभ | हर शिव भक्त जरूर पढ़े

Lord Shiva sitting on Mount Kailash with devotees performing Aarti during Shiv Chalisa 2025

Author: BhaktiParv.com


परिचय

भगवान शिव — संहारक, दयालु और कल्याणकारी देवता — हिन्दू धर्म के सबसे पूजनीय देवों में से एक हैं।
उनकी आराधना से न केवल दुख और भय का नाश होता है, बल्कि जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार भी होता है।

शिव चालीसा भगवान शिव की महिमा का वर्णन करती है। इसके प्रत्येक दोहे में भगवान शिव के स्वरूप, शक्ति और कृपा का गहन वर्णन मिलता है।
2025 में जब महाशिवरात्रि और श्रावण मास जैसे शुभ पर्व आने वाले हैं, उस समय शिव चालीसा का पाठ अत्यंत फलदायी रहेगा।

इस पोस्ट में आपको मिलेगा — शिव चालीसा का पूरा पाठ हिंदी में, साथ ही इसका महत्व और पाठ के लाभ।


शिव चालीसा का महत्व

शिव चालीसा का पाठ करने से मानसिक शांति, पारिवारिक सुख, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उत्थान प्राप्त होता है।
यह न केवल भौतिक जीवन को संतुलित करता है बल्कि आत्मा को भी ईश्वर से जोड़ता है।
2025 में शिव चालीसा का पाठ आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और नई शुरुआत का आशीर्वाद लेकर आएगा।


॥ श्री शिव चालीसा ॥

॥ दोहा ॥

जय गणेश गिरिजा सुवन,
मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम,
देहु अभय वरदान॥


॥ चौपाई ॥

जय गिरिजा पति दीन दयाला।
सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥

भाल चन्द्रमा सोहत नीके।
कानन कुण्डल नागफनी के॥

अंग गौर शिर गंग बहाये।
मुण्डमाल तन क्षार लगाए॥

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे।
छवि को देखि नाग मन मोहे॥

मैना मातु की हवे दुलारी।
बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी।
करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे।
सागर मध्य कमल हैं जैसे॥

कार्तिक श्याम और गणराऊ।
या छवि को कहि जात न काऊ॥

देवन जबहीं जाय पुकारा।
तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥

किया उपद्रव तारक भारी।
देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥

तुरत षडानन आप पठायउ।
लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥

आप जलंधर असुर संहारा।
सुयश तुम्हार विदित संसारा॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई।
सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥

किया तपहिं भागीरथ भारी।
पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं।
सेवक स्तुति करत सदाहीं॥

वेद नाम महिमा तव गाई।
अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला।
जरत सुरासुर भए विहाला॥

कीन्ही दया तहं करी सहाई।
नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा।
जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥

सहस कमल में हो रहे धारी।
कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥

एक कमल प्रभु राखेउ जोई।
कमल नयन पूजन चहं सोई॥

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर।
भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥

जय जय जय अनन्त अविनाशी।
करत कृपा सब के घटवासी॥

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै।
भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो।
येहि अवसर मोहि आन उबारो॥

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो।
संकट से मोहि आन उबारो॥

मात-पिता भ्राता सब होई।
संकट में पूछत नहिं कोई॥

स्वामी एक है आस तुम्हारी।
आय हरहु मम संकट भारी॥

धन निर्धन को देत सदा हीं।
जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥

अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी।
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥

शंकर हो संकट के नाशन।
मंगल कारण विघ्न विनाशन॥

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं।
शारद नारद शीश नवावैं॥

नमो नमो जय नमः शिवाय।
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥

जो यह पाठ करे मन लाई।
ता पर होत है शम्भु सहाई॥

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी।
पाठ करे सो पावन हारी॥

पुत्र हीन कर इच्छा जोई।
निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥

पण्डित त्रयोदशी को लावे।
ध्यान पूर्वक होम करावे॥

त्रयोदशी व्रत करै हमेशा।
ताके तन नहीं रहै कलेशा॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे।
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥

जन्म जन्म के पाप नसावे।
अन्त धाम शिवपुर में पावे॥

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी।
जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥


॥ दोहा ॥

नित्त नेम कर प्रातः ही,
पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना,
पूर्ण करो जगदीश॥

मगसर छठि हेमन्त ॠतु,
संवत चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि,
पूर्ण कीन कल्याण॥

शिव चालीसा पाठ विधि

  1. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. भगवान शिव के सामने दीपक और अगरबत्ती जलाएं।
  3. बेलपत्र, दूध, जल और धतूरा चढ़ाएं।
  4. शांत मन से शिव चालीसा का पाठ करें।
  5. पाठ के बाद “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें और आरती करें।

शिव चालीसा पाठ के लाभ

  • सभी संकटों और भय से मुक्ति मिलती है।
  • जीवन में सुख, शांति और सफलता प्राप्त होती है।
  • मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
  • नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
  • भक्त को भगवान शिव का दिव्य आशीर्वाद मिलता है।

अंतिम विचार

शिव चालीसा 2025 का पाठ भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल और प्रभावशाली माध्यम है।
यह न केवल भक्ति का प्रतीक है बल्कि आत्मिक शांति का मार्ग भी है।
जो भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका पाठ करता है, उसके जीवन से सभी दुख और बाधाएँ दूर होती हैं।

जय भोलेनाथ! हर हर महादेव!

FAQs

प्रश्न 1. शिव चालीसा कब पढ़नी चाहिए?

उत्तर: सोमवार, महाशिवरात्रि या प्रदोष व्रत के दिन इसका पाठ सबसे शुभ होता है।

प्रश्न 2. क्या शिव चालीसा रोज़ पढ़ी जा सकती है?

उत्तर: हाँ, प्रतिदिन सुबह या रात में श्रद्धा से पढ़ना अत्यंत लाभकारी है।

प्रश्न 3. शिव चालीसा पढ़ने से क्या लाभ मिलता है?

उत्तर: शांति, सफलता, स्वास्थ्य और भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है।

प्रश्न 4. क्या उपवास के बिना शिव चालीसा पढ़ सकते हैं?

उत्तर: हाँ, भक्ति सबसे बड़ा नियम है; उपवास आवश्यक नहीं।

Category: Maha Shivratri 2025 | Lord Shiva | Hindu Devotion

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